Inspirational Quotes (in Hindi) ; Swami Vivekananda

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हेलो, मेरे प्रिय दुनिया के तमाम पाठकों, दर्शकों, दोस्तों और छात्रों ! स्वामी विवेकानंद के बारे में आप सभी ज़रूर जानते होंगे, चाहे आप किसी भी धर्म, देश, जाति के हो। सन  1893 में अमेरिका के शिकागो शहर में आयोजित बिशाल समारोह  ‘विश्व धर्म महासम्मेलनमें हिन्दू धर्म तथा भारत के प्रतिनिधितव इन्होनें ही किये थे।   इस महान जिम्मेदारी के बदौलत उनको सारे विश्व ने पहचान लिया।  नीचे मैं स्वामी विवेकानंद के कुछ महत्वपूर्ण और अनमोल वचनों को इकठ्ठा करके प्रस्तुत कर रहा हूँ।  आप एक एक करके इन वचनों या कथनों को ध्यानपूर्वक पढ़िए, आपको इनसे प्रेरणा, जोश, ऊर्जा, विटामिन, पुष्टि आदि मिलेगा, जो आपके वर्त्तमान के अति संघर्ष पूर्ण जीवन यापन के लिए ज़रूरी ही नहीं, अत्यावश्यक भी हैं। 

      

 स्वामी विवेकानंद  : (Quotes by Swami Vivekananda in Hindi)
  • उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान निबोधत

Meaning in English :  Arise, awake, and stop not till the goal is reached.

यह उक्ति, ‘कठोपनिषद’ जो की हिन्दू धर्मशास्त्र जगत के 108 उपनिषदों में से एक है, से लिया गया। यह उक्ति या श्लोक विवेकानद जी के बड़ा ही प्रिय था और उन्होंने इसका जबरदस्त प्रचार किया ।

  • जो ईश्वर आपके सामने बहुत रूपों में उपस्थित हैं, उसे छोड़कर आप कहाँ ईश्वर ढूंढ रहें हो ? जो जीवों से प्रेम करते हैं वही सच में ईश्वर से प्रेम करते हैं ।

*** ऊपर के दोनों विवेकानंद जी के प्रसिद्ध और बहु प्रचारित उक्तियाँ हैं।    

 

  • अरे शेरों, उठो ! और इस भ्रम को दूर फेंको कि आप भेड़ (निर्बल, sheep) हो, आप अमर आत्मा हो; आप आशीर्वाद प्राप्त उन्मुक्त शाश्वत जीव हो; आप जड़ पदार्थ (matter) नहीं हो, शरीर नहीं हो; आप जड़ पदार्थ के सेवक नहीं हो, बल्कि जड़ पदार्थ आपका सेवक है ।
  • जिस तरह से विभिन्न स्रोतों से उत्पन्न विभिन्न धाराएँ अपना जल समुद्र में मिला देती हैं, उसी प्रकार मनुष्य का प्रवृत्तियों (मार्ग, tendencies), चाहे टेढ़ा (crooked) सीधा (straight) विभिन्न  दिखाई दे, सारे ईश्वर की ओर ही जाते हैं ।
  • कभी मत सोचिये कि आत्मा के लिए कुछ असंभव है. ऐसा सोचना सबसे बड़ा विधर्म (पाषंड, heresy) है. अगर कोई पाप है, तो वो यही है; ये कहना कि आप दुर्बल हो या अन्य दुर्बल हैं ।

खुद को कमजोर समझना सबसे बड़ा पाप है ।

  • एक शब्द में कहे, आदर्श यही है कि आप दिव्य (ईश्वरीय , divine) हो ।
  • हम वो हैं जो हमारी सोच (thoughts) ने हमें बनाया है, इसलिए आप क्या सोचते हैं इस पर सावधानी बरतिए । शब्द (words) गौण हैं । सोच या विचार जिंदा रहते हैं, वे दूर तक यात्रा करते हैं ।
  • हम जितना ज्यादा बाहर आएं और दूसरों का भला करें, हमारा ह्रदय उतना ही शुद्ध होगा, और ईश्वर उनमें  बसेंगे ।
  • ब्रह्माण्ड की सारी शक्तियां पहले से ही हमारी हैं । ये हम ही हैं जो अपनी आँखों पर हाँथ रख लेते हैं और फिर रोते हैं कि कितना अन्धकार है ।
  • सत्य (truth) को हज़ार तरीकों से बताया जा सकता है, फिर भी हर एक सत्य ही होगा ।
  • जब तक आप खुद पे विश्वास नहीं करते हो तब तक आप भगवान पे विश्वास नहीं कर सकते.
  • उस व्यक्ति ने अमरत्व (immortality) को प्राप्त कर लिया है, जो किसी सांसारिक वस्तु से विचलित नहीं होता ।
  • किसी की निंदा ना करें: अगर आप मदद के लिए हाथ बढ़ा सकते हैं, तो ज़रुर बढाएं. अगर नहीं बढ़ा सकते, तो अपने हाथ जोड़िये, अपने भाइयों को आशीर्वाद दीजिये, और उन्हें उनके मार्ग पे जाने दीजिये ।
  • विश्व एक बड़ा व्यायामशाला (gymnasium) है जहाँ हम खुद को मजबूत(strong) बनाने के लिए आते हैं ।
  • बाहरी प्रकृति (external nature) केवल अंदरूनी प्रकृति का बड़ा रूप (writ large) है ।
  • भगवान् को एक परम प्रिय के रूप में पूजा की जानी चाहिए, इस और अगले जीवन की सभी चीजों से भी प्रियतर मानकर ।
  • इस दुनिया में सभी भेद-भाव या विविधता किसी स्तर (degree, level) के हैं, किसी प्रकार के नहीं, क्योंकि एकता ही सभी चीजों का रहस्य (secret) है ।
  • अगर धन दूसरों की भलाई करने में मदद करे, तो इसका कुछ मूल्य है, अन्यथा, ये सिर्फ बुराई का एक ढेर है, और इससे जितना जल्दी छुटकारा मिल जाये उतना बेहतर है ।
  • जब कोई विचार (idea) अनन्य रूप से मस्तिष्क पर अधिकार कर लेता है तब वह वास्तविक भौतिक या मानसिक अवस्था में परिवर्तित हो जाता है ।
  • जिस क्षण मैंने यह जान लिया कि भगवान हर एक मानव शरीर रुपी मंदिर में विराजमान हैं, जिस क्षण मैं हर व्यक्ति के सामने श्रद्धा से खड़ा हो गया और उसके भीतर भगवान को देखने लगा – उसी क्षण मैं बन्धनों से मुक्त हूँ, हर वो चीज जो बांधती है गायब हो जाता है, और मैं स्वतंत्र (free) हूँ ।
  • वेदान्त कोई पाप नहीं जानता, वो केवल त्रुटी जानता है । और वेदान्त कहता है कि सबसे बड़ी त्रुटी यह कहना है कि आप कमजोर हो, आप  पापी हो, एक तुच्छ प्राणी हो, और आपके पास कोई शक्ति नहीं है और आप ये-वो नहीं कर सकते ।
  • हमारा कर्तव्य है कि हम हर किसी को उसका उच्चतम आदर्श जीवन जीने के संघर्ष में प्रोत्साहन करें, और साथ ही साथ उस आदर्श को सत्य के जितना निकट हो सके ले जाने का प्रयास करें ।
  • यदि स्वयं में विश्वास करना ( अर्थात आत्मविश्वास ) और अधिक विस्तार से पढाया और अभ्यास कराया गया होता, तो मुझे यकीन है कि अब हमारे पास जो बुराइयों और दुःख का एक बहुत बड़ा हिस्सा है, वो गायब हो गया होता ।
  • दिल और दिमाग के टकराव में दिल की ही सुनो ।
  • भला हम भगवान को खोजने कहाँ जा सकते हैं अगर उसे अपने ह्रदय और हर एक जीवित प्राणी में नहीं देख सकते ?
  • आप फ़ुटबाल के जरिये स्वर्ग के ज्यादा निकट होगे बजाये गीता का अध्ययन करने के ।
  • आपको अन्दर से बाहर की तरफ विकसित होना है। कोई आपको पढ़ा नहीं सकता, कोई आपको आध्यात्मिक नहीं बना सकता । आपकी आत्मा के अलावा कोई और गुरु नहीं है ।
  • किसी चीज से डरो मत । आप अद्भुत काम करोगे । यह निर्भयता (fearlessness) ही है जो क्षण भर में स्वर्ग (अर्थात परम सुख / आनंद ) लाती है ।
  • अगर कोई दिन आप किसी समस्या या मुसीबत का सामना न करते हो, तो आप निश्चिंत हो जाइये की आप गलत रास्ते पर चल रहे हो ।
  • सबसे बड़ा धर्म है अपने स्वभाव / प्रकृति के प्रति सच्चे होना । खुद पर विश्वास कीजिये ।
  • स्वतंत्र होने का साहस करिये । जहाँ तक आपके विचार जाते हैं वहां तक जाने का साहस करिये ,और उन्हें अपने जीवन में उतारने का साहस करिये ।
  • सारे प्रेम (love) विस्तार (expansion) है, सारे स्वार्थ संकुचन (contraction) है । इसलिए प्रेम ही जीवन जीने का एकमात्र नियम(law) है । जो प्रेम करता है वह जीता है, जो स्वार्थी है वह मर रहा है । इसलिए प्रेम के लिए प्रेम करिये, क्योंकि जीने का यही एक मात्र नियम(law) है, जैसे कि आप जीने के लिए सांस लेते हो ।
  • मनुष्य की सेवा करो । भगवान की सेवा करो ।
  • श्री रामकृष्ण कहा करते थे,“जब तक मैं जीता हूँ, तब तक मैं सीखता हूँ”। वह व्यक्ति या वह समाज अभी ही मौत के जबड़े में है जिसके पास सीखने को कुछ नहीं है ।
  • जब लोग आपको गाली दें (revile) तब आप उन्हें आशीर्वाद दीजिये । सोचिये, आपके झूठे दंभ (false ego)  को बाहर निकालकर वे आपकी कितनी भलाई कर रहे हैं ।
  • आकांक्षा (desire), अज्ञानता (ignorance), और असमानता (inequality) – ये बंधन (bondage)  की त्रिमूर्तियां (trinity) हैं ।
  • कुछ मत पूछिए, बदले में कुछ मत मांगिये । जो आपके पास देने के लिए है, वह दीजिए, वो आप तक वापस आएगा, पर उसके बारे में अभी मत सोचिये ।
  • ना खोजो ना बचो, जो आता है ले लो ।
  • बस वही जीते हैं, जो दूसरों के लिए जीते हैं ।
  • सच्ची सफलता, सच्ची आनंद का सबसे बड़ा रहस्य यह है: वह पुरुष या स्त्री जो बदले में कुछ नहीं मांगता, पूर्ण रूप से निःस्वार्थ व्यक्ति, सबसे सफल है ।
  • जो अग्नि हमें गर्मी देती है, हमें नष्ट भी कर सकती है, यह अग्नि का दोष नहीं है ।
  • शक्ति (strength) जीवन है, दुर्बलता (weakness) मृत्यु है । विस्तार (expansion) जीवन है, संकुचन (contraction) मृत्यु है । प्रेम (love) जीवन है, द्वेष (hatred) मृत्यु है ।
  • हम जो बोते हैं वही काटते हैं । हम स्वयं अपने भाग्य के विधाता हैं । हवा (wind) बह रही है, वे जहाज (vessels) जिनके पाल (sail) खुले होते हैं, इसे पकड़ लेते हैं, और अपनी दिशा में आगे बढ़ते हैं, पर वे जहाज जिनके पाल बंधे होते हैं, हवा को नहीं पकड़ पाते । क्या यह हवा की गलती है ?…..हम खुद अपना भाग्य / लक्ष्य (destiny) बनाते हैं ।
  • शारीरिक (physically), बौद्धिक (intellectually) और आध्यात्मिक (spiritually) रूप से जो कुछ भी कमजोर बनाता है, उसे ज़हर (poison) की तरह त्याग दो ।
  • एक समय में एक काम करो, और ऐसा करते समय अपनी पूरी आत्मा उसमे डाल दो और बाकी सब कुछ भूल जाओ ।
  • मन / मस्तिष्क की शक्तियां (powers of the mind) सूर्य की किरणों (rays of the sun) के समान हैं । जब वो केन्द्रित (concentrated) होती हैं, चमक उठती (illumine) हैं ।
  • भगवान से प्रेम का यह बंधन (attachment) वास्तव में ऐसा है जो आत्मा को बांधता नहीं है, बल्कि प्रभावी ढंग से (effectively) उसके सारे बंधन को तोड़ देता है ।
  • धन्य हैं वो लोग जिनके शरीर दूसरों की सेवा करने में नष्ट हो जाते हैं ।
  • कुछ सच्चे (heart-whole), इमानदार (sincere) और उर्जावान (energetic) पुरुष और महिलाएं, कोई भीड़ (mob) एक सदी (century) में जितना कर सकती है, उससे अधिक एक वर्ष में ही कर सकते हैं ।
  • एक विचार लो, उस विचार को अपना जीवन बना लो – उसके बारे में सोचो, उसके सपने देखो, उस विचार को जियो । अपने मस्तिष्क, मांसपेशियों, नसों, शरीर के हर हिस्से को उस विचार में डूब जाने दो, और बाकी सभी विचार को किनारे रख दो । यही है सफलता की रास्ता ।
  • जो आप सोचते हो वो हो जाओगे. यदि आप  खुद को कमजोर (weak) सोचते हो, तो  कमजोर हो जाओगे, अगर खुद को ताकतवर (strong) सोचते हो, तो ताकतवर हो जाओगे ।

 

तो, पाठकों, दर्शकों, दोस्तों, छात्रों ! है , वास्तव ज़िंदगी से जुड़ी हुई कितनी सुन्दर सब बचन  ! जैसे कि मेरा भी मानना है कि इनमें से कुछ वचनों को लेकर आपका मतभेद हो सकता है. नाना मुनि नाना मति ! खैर, जो भी हो, इन बचनों को पड़कर आप सब को कैसा लगा ? मुझे कमेंट (comment)के माध्यम से ज़रूर बताएं, अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को Facebook और अन्य social media के माध्यम से ज़रूर share करें  !

अगर आप चाहें, तो अंग्रेजी में भी इन सब वचनों का एक संस्करण  यहां क्लिक  करने पर उपलब्ध होगा I

 

धैर्यपूर्वक पढ़ने के लिए आप सबको अनेकों अनेक धन्यवाद  !

 

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